Nepal Tibet में बाढ़ की तबाही : 616 मौतें, 1,924 लापता ; 320 भारतीयों से संपर्क नहीं

ख़बर रफ़्तार, काठमांडू : Nepal Tibet नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल पुलिस की ओर से जारी ताजा जानकारी के मुताबिक, बाढ़ और उससे जुड़े हादसों में मृतकों की संख्या बढ़कर 616 हो गई है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 320 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं नेपाल में फंसे अन्य भारतीय पर्यटकों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें भी जारी हैं।

हजारों सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के लिए 15,431 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा गया है।

इनमें नेपाल आर्मी के 6,755 जवान, नेपाल पुलिस के 4,473 जवान और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 जवान शामिल हैं। इसके अलावा नेपाल पुलिस के करीब 8,799 कर्मियों को भी खोज, बचाव और राहत कार्य में लगाया गया है।

चितवन में सबसे ज्यादा मौतें

बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान चितवन जिले में हुआ है। यहां 233 शव बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 158, नुवाकोट में 89, गोरखा में 48, नवलपरासी वेस्ट में 47, धाडिंग में 45 और तनहुन में 31 शव मिलने की जानकारी सामने आई है। रसुवा में भी कई शव बरामद किए गए हैं।

लापता लोगों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी, विदेशी नागरिक, स्थानीय लोग और सरकारी एवं सुरक्षा विभागों से जुड़े लोग शामिल हैं। अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के सैकड़ों कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।

4,451 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला

रेस्क्यू टीमों ने अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इनमें हाइड्रोइलेक्ट्रिक टनल से बचाए गए 191 लोग और हवाई मार्ग से निकाले गए 517 लोग भी शामिल हैं। 129 विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।

हालांकि, खराब मौसम ने बचाव अभियान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। त्रिशूली इलाके में भारी बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा है।

पत्थर और कीचड़ के सैलाब से बची जान

बाढ़ से बचाए गए लोगों ने तबाही का खौफनाक मंजर बताया है। नेपाल में फंसे 21 तमिल नागरिकों को रेस्क्यू फ्लाइट के जरिए चेन्नई लाया गया। इन लोगों ने बताया कि जिस तरह पत्थर और कीचड़ पानी के साथ सुनामी की तरह उनकी तरफ आए, उससे बच निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

महाराष्ट्र के सैकड़ों पर्यटक नेपाल में फंसे

नेपाल की बाढ़ के बाद महाराष्ट्र के करीब 290 लोग फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक इन लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है, जबकि राज्य के करीब 60 पर्यटकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।

इसके अलावा नेपाल में मौजूद महाराष्ट्र के 105 लोग भारत वापस लौट रहे हैं। राज्य प्रशासन प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के संपर्क में है।

असम के 12 लोग भी लापता

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, नेपाल में आई बाढ़ के बाद राज्य के 12 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। प्रशासन इन लोगों से संपर्क स्थापित करने और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रहा है।

लापता लोगों के परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार ने नेपाल प्रशासन के साथ संपर्क कर उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास तेज किए हैं।

ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं

नेपाल-चीन सीमा के आसपास आई बाढ़ के बाद ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं होने की खबर ने भी चिंता बढ़ा दी है। बताया गया है कि इस समूह में 19 देशों के लोग शामिल थे।

समूह की कोऑर्डिनेटर के मुताबिक, राहत और बचाव के लिए संबंधित अधिकारियों और विभिन्न दूतावासों से संपर्क किया जा रहा है। फिलहाल इन 77 लोगों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

बंगाल के 37 लोग भी लापता

नेपाल में फंसे भारतीयों में पश्चिम बंगाल के पर्यटकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 37 लोग लापता बताए गए हैं। इन्हें खोजने के लिए काठमांडू में एक विशेष टीम भेजने की तैयारी की गई है।

बताया गया है कि ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कोसी नदी के आसपास के इलाके में फंस गए थे। हालांकि, दो लोगों के सुरक्षित मिलने की जानकारी राहत देने वाली है।

320 भारतीय लापता या संपर्क से बाहर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद 320 भारतीय या तो लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।

उन्होंने बताया कि 84 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें 21 तमिलनाडु के नागरिक और 63 लोग त्रिशूली-I प्रोजेक्ट पर काम करने वाले लोग शामिल हैं।

वहीं चीन में करीब 400 भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं। भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है।

खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार खराब मौसम और बढ़ते जलस्तर ने राहत एवं बचाव कार्य को मुश्किल बना दिया है। हेलीकॉप्टर ऑपरेशन प्रभावित होने से कई इलाकों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।

फिलहाल सुरक्षाबल, स्थानीय प्रशासन और राहत टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। इस भीषण आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत में तबाही का असर अभी भी बड़े इलाके में दिखाई दे रहा है।

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