ख़बर रफ़्तार, देहरादून : Delhi Dehradun Expressway हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 12,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने 213 किलोमीटर लंबे छह लेन Delhi–Dehradun Expressway का उद्घाटन किया गया था। इस एक्सप्रेसवे को उत्तराखंड के विकास की बड़ी परियोजना माना जा रहा है।
हालांकि, इसके बाद अब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे बनने के बावजूद देहरादून शहर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
शहर पर बढ़ता ट्रैफिक दबाव
हरीश रावत ने कहा कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाला ट्रैफिक, विशेषकर मसूरी, टिहरी और अन्य पहाड़ी इलाकों की ओर जाने वाला यातायात, सीधे बाईपास के जरिए भेजा जाना चाहिए था। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में सारा ट्रैफिक देहरादून शहर के भीतर से गुजर रहा है, जिससे शहर पर भारी दबाव बन रहा है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति के कारण न केवल देहरादून शहर “घुटने लगा” है, बल्कि मसूरी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा भी प्रभावित हो रही है।
बाईपास व्यवस्था की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि योजना बनाते समय ट्रैफिक डायवर्जन और बाईपास रूट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। यदि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जाने वाला ट्रैफिक शहर के बाहर से डायवर्ट किया जाए तो देहरादून पर अनावश्यक दबाव कम हो सकता है और यात्रा अधिक सुगम बन सकती है।
विकास बनाम योजना पर सवाल
हरीश रावत ने आगे कहा कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब वह आम जनता के जीवन को आसान बनाए, न कि उसे और कठिन करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजना निर्माण के समय स्थानीय भूगोल, ट्रैफिक पैटर्न और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
