खबर रफ्तार, भराड़ीसैंण(चमोली) : सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो रही है। वहीं, सदन के बाहर हर किसी की जुबान पर यही है कि सत्र कब समाप्त हो रहा है।
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण की पहाड़ी पर बांज व बुरांस के जंगलों से घिरे भराड़ीसैंण में इन दिनों को मौसम खुशनुमा है। दिन के समय सुनहरी धूप और सुबह-शाम ठंड है। राज्य आंदोलन की अवधारणा के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का सपना तो है, लेकिन यहां कोई रुकना नहीं चाहता है।
सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच सदन की अवधि बढ़ाने का मुद्दा
सरकार ने 13 मार्च तक सत्र की अवधि तय की है। सदन में विपक्ष की ओर से सत्र की अवधि बढ़ाने की लगातार मांग की जा रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष नहीं चाहता है सदन चले। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि सरकार गैरसैंण में नहीं रुकना चाहती है। बजट सत्र को आनन-फानन में निपटाया जा रहा है। जबकि बजट पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री का कहना है कि सरकार में विपक्ष के हर मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है। विपक्ष की मंशा नहीं है कि सदन चले।
सरकार ने 13 मार्च तक सत्र की अवधि तय की है। सदन में विपक्ष की ओर से सत्र की अवधि बढ़ाने की लगातार मांग की जा रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष नहीं चाहता है सदन चले। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि सरकार गैरसैंण में नहीं रुकना चाहती है। बजट सत्र को आनन-फानन में निपटाया जा रहा है। जबकि बजट पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री का कहना है कि सरकार में विपक्ष के हर मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है। विपक्ष की मंशा नहीं है कि सदन चले।
गैरसैंण बने स्थायी राजधानी बनाई
बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने कहा, राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाना चाहिए। भराड़ीसैंण विधानसभा सिर्फ एक भवन नहीं है, यह जनभावनाओं का मंदिर है। सड़कें, स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाओं का विकास होना चाहिए।

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