प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर नियामक आयोग पहुंचे उपभोक्ताओं ने कहा कि यूपी में पांच साल से बिजली के दामों में बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन उत्तराखंड में हर साल क्यों की जा रही है। उद्योग प्रतिनिधियों ने जहां इसे उद्योगों के लिए घातक करार दिया तो आम उपभोक्ता भी आयोग के समक्ष नाराज नजर आए।
शुक्रवार को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सुनवाई कक्ष में आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी और सदस्य विधि अनुराग शर्मा ने प्रस्तावित नई विद्युत दरों पर जनसुनवाई की।जनसुनवाई में पहुंचे यशवीर आर्य, उम्मेद सिंह, रमेश जोशी, प्रदीप सती समेत कई प्रतिनिधियों ने कहा कि यूपी में कई वर्षों से बिजली के दाम नहीं बढ़ लेकिन यहां बार-बार बढ़ाए जा रहे हैं
जनसुनवाई में पूर्व अधिकारी एसएम बिजल्वाण ने कहा कि लाइन हानियों को कम करने, विभागों से वसूली करने के बजाए आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। यूकेडी की प्रतिनिधि मीनाक्षी घिल्डियाल ने स्मार्ट मीटर से स्वत: कनेक्शन लोड बढ़ाने को लूट करार देते हुए रोकने की मांग की। हालांकि मामले में यूपीसीएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यूपी में राज्य सरकार सब्सिडी देती है, जिस कारण दरें नहीं बढ़ती लेकिन उत्तराखंड में ऐसा प्रावधान नहीं है।
स्मार्ट मीटर में गड़बड़ लगे तो तुरंत बताएं, चेक मीटर लगाएंगे
स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ता खफा नजर आए। कई उपभोक्ताओं का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उनका बिल लगभग दोगुना हो गया। हालांकि यूपीसीएल प्रतिनिधियों का कहना था कि अगर किसी के स्मार्ट मीटर में कोई गड़बड़ी लग रही है तो वह यूपीसीएल को बताए, चेक मीटर लगाया जाएगा। यूपीसीएल प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर को लेकर सुझाव भी मांगे। पहली बार आयोग में इतनी भीड़ उमड़ी।
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