बरेली में पप्पू की एंट्री, सोमेश्वर में सियासी भूचाल!

ख़बर रफ़्तार, उत्तराखंड : उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का राजनीतिक भविष्य अब चर्चा के केंद्र में है, और इसकी मुख्य वजह हैं उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू, जिन्हें अब तक पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने वाला ‘किंगमेकर’ माना जाता था। लेकिन अब पप्पू खुद सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए अपने पैतृक शहर बरेली की बिथरी चैनपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

इस फैसले ने उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक सियासी हलचल तेज कर दी है। सवाल उठने लगे हैं कि अगर पप्पू पूरी तरह बरेली की राजनीति में व्यस्त हो जाते हैं, तो क्या सोमेश्वर में रेखा आर्या की पकड़ कमजोर पड़ सकती है? अब तक उनकी हर चुनावी जीत के पीछे पप्पू की रणनीति और प्रबंधन अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

2002 में जिला पंचायत सदस्य से शुरू हुआ रेखा आर्या का राजनीतिक सफर, निर्दलीय विधायक, फिर कांग्रेस और बाद में भाजपा तक पहुंचा—और इस पूरे सफर में पप्पू का योगदान लगातार मजबूत रहा। लेकिन अब जब वे खुद चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि रेखा आर्या इस नए राजनीतिक दबाव को किस तरह संभालती हैं।

इधर खबर है कि कांग्रेस भी सोमेश्वर सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो सकता है। बरेली में हाल ही में हुई एक सभा में पप्पू की अनुपस्थिति के बावजूद उनके बेटे रिंकू साहू ने बड़ी भीड़ जुटाकर चुनावी इरादों के स्पष्ट संकेत दे दिए। खुद पप्पू भी चुनाव लड़ने की बात स्वीकार कर चुके हैं, हालांकि रेखा आर्या के चुनाव पर इसके असर को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या एक ‘किंगमेकर’ खुद ‘किंग’ बनने की राह पर है? और क्या इस बदलाव का असर रेखा आर्या की राजनीति पर पड़ेगा? आने वाले समय में बरेली और सोमेश्वर की सियासत कई नए समीकरण तय कर सकती है।

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