मेरठ में सीलिंग के विरोध में व्यापारी हड़ताल, सेंट्रल मार्केट ठप

खबर रफ्तार, मेरठ : यूपी के मेरठ स्थित शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बुधवार को 44 भवनों पर आवास विकास ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सील लगा दी। इसे लेकर व्यापारियों ने दिनभर हंगामा किया और बृहस्पतिवार यानी आज मेरठ बंद का आह्वान किया गया है।

सेंट्रल मार्केट में सीलिंग और आवास विकास परिषद के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा भड़क उठा है। व्यापारियों द्वारा सेंट्रल मार्केट के समर्थन में बृहस्पतिवार को पूरे शहर को बंद रखा गया है और मार्केट में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। विभिन्न व्यापारी एसोसिएशनों ने एकजुटता का आह्वान किया है, जिसके चलते शहर के कई प्रमुख बाजारों से व्यापारी इस आंदोलन में शामिल होने पहुंचे हैं।
माधवपुरम, परतापुर, शास्त्रीनगर और जागृति विहार सहित कई प्रमुख बाजारों के व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर सेंट्रल मार्केट में चल रहे धरने का समर्थन किया है। इस एकजुटता के प्रदर्शन ने आवास विकास परिषद के खिलाफ व्यापारियों के रोष को स्पष्ट रूप से दर्शाया है। व्यापारियों ने कहा कि हमारे पेट पर लात मत मारो। सरकार से मामले का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है।
आवास विकास के खिलाफ आक्रोश
व्यापारियों का यह आंदोलन मुख्य रूप से आवास विकास परिषद की नीतियों और कार्रवाईयों के विरोध में है। धरने के दौरान व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार से न्याय की गुहार लगाई।
शहर के बड़े हिस्से में बाजार बंद रहने के कारण आम जनजीवन पर भी इसका असर देखा जा रहा है। सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में भारी संख्या में व्यापारियों की मौजूदगी के साथ यह विरोध प्रदर्शन जारी है।
सेंट्रल मार्केट में एकसाथ 44 भवन सील किए 
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद बुधवार को आवास एवं विकास परिषद ने शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को पूरी तरह सील कर दिया था।
भारी पुलिस बल और सात अलग-अलग टीमों के साथ चले इस अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश देखा गया। इस कार्रवाई के विरोध में संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों ने एकजुट होकर बृहस्पतिवार को मेरठ बंद का ऐलान किया था।
लोकेश खुराना ने डाली थी याचिका
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा दायर अवमानना याचिका के बाद परिषद ने सोमवार को उन 44 भवनों की सूची सौंपी थी, जहां पूरी तरह से व्यावसायिक कार्य हो रहे थे। इन 44 भवनों में बड़े शोरूम और कॉम्प्लेक्स के साथ ही 6 अस्पताल, 6 स्कूल और 4 बैंक्वेट हॉल (मंडप) चल रहे थे। सभी पर सील लगा दी गई।
ये बोले धरने पर बैठे लोग 
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने कहा कि आज दुख का विषय है। कुछ नहीं कर सकते तो यहां धरने पर आ सकते हैं। करोड़ों का नुकसान हो रहा है। एकजुट रहो, हमारा पूरा सहयोग रहेगा।
कांग्रेस नेता अवनीश काजला ने कहा कि यह सिर्फ व्यापारियों की नहीं, पूरे मेरठ के लोगों की लड़ाई है।
दवा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल अग्रवाल ने कहा कि यह बंद चेतना और दुख का बंद है। 25 साल से व्यापारी की कमर्शियल रजिस्ट्री है, जीएसटी नंबर है, बिजली का बिल कमर्शियल है। हमने कोई कब्जा नहीं किया है। जमीन भी हमारी है। हमारी जमीन का सिर्फ भू उपयोग परिवर्तित है। पूर्व के वर्षों में पांच मिनट में मामले सुलट गए। आज इच्छा शक्ति की कमी है।
किन्नर एसोसिएशन से इशिका और शिवानी ने कहा कि 30 साल से सेंट्रल मार्केट की वजह से हमारे घर के चूल्हे जल रहे हैं। अगर सेंट्रल मार्केट नहीं रहा तो हमारा गुजारा भी मुश्किल हो जाएगा। हमारी सरकार से अपील है कि सेंट्रल मार्केट को ना तोड़ा जाए।

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