नैनीताल: जिम कॉर्बेट में गुलदार और बाघ पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का खतरा, जानिए क्या है ये घातक बीमारी

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खबर रफ़्तार, रामनगर:  कार्बेट लैंडस्केप में बाघ व गुलदार को घातक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बचाने के लिए भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण व जलवायु मंत्रालय ने कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के लिए तीन वर्षीय शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है।

नेशनल मिशन फॉर हिमालयन स्टडी के अंतर्गत पहले चरण में कार्बेट के बाहर के दो किलोमीटर की परिधि में कुत्तों का वैक्सीनेशन कराया जाएगा, जिसमें इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आइवीआरआइ) बरेली व पशुपालन विभाग का सहयोग लिया जाएगा। इस वायरस से बाघ व गुलदार के नर्वस सिस्टम पर सीधे असर पड़ता है।

इन देशों में दिखा वायरस

रूस, मलेशिया नेपाल और उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संबंधित मामले सामने आने के बाद कार्बेट के लिए यह शोध बेहद अहम साबित होगा। इस पर करीब 2.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कैनाइन डिस्टेंपर संक्रामक जानलेवा वायरस है जो कुत्तों में पाया जाता है।

कुत्तों से वायरस फैलने का है खतरा

असल में कार्बेट का जंगल आबादी से लगा हुआ है। ऐसे में बाघ व गुलदार आबादी क्षेत्र में भी आते-जाते हैं। कई बार कुत्ते भी जंगल में जाकर सांभर, चीतल का शिकार करते हैं या फिर वह खुद शिकार हो जाते हैं। ऐसे में कुत्तों से यह जानलेवा वायरस बाघ व गुलदार में फैलने का खतरा रहता है।

किया जा रहा है शोध

कार्बेट में इस जानलेवा वायरस का पता लगाने के लिए सीटीआर के निदेशक धीरज पांडे ने वन एवं पर्यावरण व जलवायु मंत्रालय की नेशनल मिशन फॉर हिमालयन स्टडी के डिजीज सर्विलांस (रोग निगरानी) के तहत तीन वर्षीय प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था, जिसे स्वीकृत कर लिया गया है।

इस शोध का उद्देश्य क्षेत्र के कुत्तों, बाघ व गुलदार में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की संभावना का पता लगाना है, ताकि भविष्य में इसे फैलने से रोका जा सके।प्रोजेक्ट के इन्वेस्टीगेटर सीटीआर निदेशक धीरज पांडे व सहायक इन्वेस्टीगेटर कार्बेट के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी दुष्यंत शर्मा होंगे। पशुपालन विभाग कुत्तों के वैक्सीनेशन में सहयोग करेगा।

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ऐसे पूरा होगा शोध

कुत्तों, बाघ व गुलदार का तीन साल तक सैंपलिंग और टीकाकरण होगा। इसमें कार्बेट क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए बाघों के रक्त के साथ ही रेक्टल व ओरल स्वैब के सैंपल एवं मृत बाघ व गुलदार के ब्रेन एवं तिल्ली के सैंपल आइवीआरआइ बरेली जांच के लिए भेजे जाएंगे। कार्बेट के बाहर दो किलोमीटर की परिधि में घरेलू व आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कुत्तों के रक्त के नमूने भी लिए जाएंगे।

यह है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के मामले अभी दुर्लभ हैं। यह अत्यधिक संक्रामक और जानलेवा संक्रमण है। यह एक ही समय में कई शारीरिक प्रणालियों पर हमला करता है। इसके लिए टीका मौजूद है। इस शोध से राष्ट्रीय स्तर पर बाघ व गुलदार में कैनाइन डिस्टेंपर को लेकर एक राष्ट्रीय रोग निगरानी नियम बनाया जा सकता है।

 

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