Mussoorie में सफाई कर्मचारियों के हक पर सख्त हुआ आयोग, गैरहाजिर अधिकारियों को नोटिस और कर्मचारियों के PF की जांच के निर्देश

ख़बररफ़्तार , मसूरी : उत्तराखंड में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं, उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने को लेकर राज्य सफाई कर्मचारी आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। मसूरी नगर पालिका के टाउन हॉल सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। बैठक में 21 विभागों के अधिकारियों को शामिल होना था, लेकिन अधिकांश अधिकारियों के अनुपस्थित रहने पर उन्होंने अधिशासी अधिकारी और नायब तहसीलदार को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

संतोष गौरव ने स्पष्ट किया कि यदि अनुपस्थित अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो उनके वेतन रोकने की संस्तुति जिलाधिकारी से की जाएगी। बैठक में सफाई कर्मचारियों और वाल्मीकि समाज के लोगों की समस्याएं सुनी गईं। इसके साथ ही कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF), वेतन, अन्य सुविधाओं, स्वास्थ्य जांच और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

21 विभागों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी

मसूरी नगर पालिका के टाउन हॉल सभागार में आयोजित बैठक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा करना और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना था। बैठक में राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर विभागवार जानकारी ली।

बैठक में 21 विभागों की भागीदारी अपेक्षित थी, लेकिन अधिकांश अधिकारियों के उपस्थित नहीं होने पर आयोग के उपाध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण से जुड़े मामलों में विभागीय अधिकारियों की भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने अधिशासी अधिकारी और नायब तहसीलदार को अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो जिलाधिकारी से उनके वेतन रोकने की संस्तुति की जाएगी।

ठेका कंपनी के कर्मचारियों के PF और अन्य सुविधाओं की होगी जांच

बैठक में मसूरी नगर पालिका में ठेका प्रथा के तहत सफाई कार्य करा रही कंपनी से जुड़े कर्मचारियों के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। आयोग के उपाध्यक्ष ने कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) और अन्य देय सुविधाओं से संबंधित शिकायतों की जांच कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों का परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो। ठेका व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को नियमानुसार मिलने वाली सुविधाओं और भुगतान से जुड़े मामलों की गंभीरता से समीक्षा करने की जरूरत है।

संतोष गौरव ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि कर्मचारियों की शिकायतों को केवल औपचारिकता के तौर पर न लिया जाए, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कर्मचारियों को निर्धारित वेतन और श्रम कानूनों के अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए।

शिक्षित पर्यावरण मित्रों को लिपिक पदों पर तैनाती की संभावनाएं तलाशने के निर्देश

समीक्षा बैठक में नगर पालिका में कार्यरत पर्यावरण मित्रों की शैक्षिक योग्यता का विषय भी उठाया गया। आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने निर्देश दिए कि कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता का अवलोकन किया जाए और इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षित कर्मचारियों को उनकी योग्यता के अनुरूप लिपिक पदों पर तैनात करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।

उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं तलाशना है। हालांकि, लिपिक पदों पर तैनाती के संबंध में लागू सेवा नियमों, पात्रता और अन्य निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।

सफाई कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं का मामला शासन तक पहुंचेगा

आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन और सुविधाओं से संबंधित मामलों को शासन के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने नगर निकायों में वेतन निर्धारण, कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ और श्रम कानूनों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा को जरूरी बताया।

उन्होंने कहा कि शहरों की सफाई व्यवस्था में पर्यावरण मित्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में उन्हें उचित पारिश्रमिक, निर्धारित सुविधाएं और सम्मान मिलना चाहिए।

बैठक के दौरान कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित विभागों को उनके समाधान के लिए गंभीरता से काम करने को कहा गया। आयोग का जोर इस बात पर रहा कि कर्मचारियों को उनके अधिकारों और सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।

वाल्मीकि बस्ती में शिविर लगाकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर

सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए आयोग के उपाध्यक्ष ने वाल्मीकि बस्ती में शिविर आयोजित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के सहयोग से ऐसे शिविर लगाए जाने चाहिए, जिनमें लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

उन्होंने कर्मचारियों के परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था पर भी जोर दिया। शिविरों के माध्यम से कर्मचारियों और उनके परिजनों की समस्याएं जानने तथा संबंधित विभागों तक उनकी शिकायतें पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

आयोग ने अधिकारियों से कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देने और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए समन्वय के साथ काम करने को कहा।

सफाई कर्मचारियों के सम्मान और कल्याण पर दिया जोर

संतोष गौरव ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब अधिकांश लोग सुबह अपने घरों में होते हैं, उस समय पर्यावरण मित्र सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में जुटे रहते हैं। उनकी मेहनत से ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुचारु रूप से चलती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ उनके अधिकारों और सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुरूप सफाई व्यवस्था के साथ सफाई कर्मचारियों के हितों को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश, कार्रवाई पर रहेगी नजर

मसूरी में हुई समीक्षा बैठक के दौरान आयोग ने कर्मचारियों के PF और अन्य सुविधाओं की जांच, अनुपस्थित अधिकारियों को नोटिस जारी करने तथा शिक्षित पर्यावरण मित्रों की योग्यता के अनुरूप तैनाती की संभावनाओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

विशेष रूप से पर्यावरण मित्रों की शैक्षिक योग्यता से जुड़े मामले में अधिशासी अधिकारी को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। वहीं, अनुपस्थित अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में उनके वेतन रोकने की संस्तुति जिलाधिकारी से किए जाने की बात कही गई है।

अब संबंधित विभागों की कार्रवाई और आयोग को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा, ताकि उन्हें नियमानुसार वेतन, सुविधाएं और सम्मान मिल सके।

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