ख़बररफ़्तार , जैसलमेर : राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को परखने के उद्देश्य से संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अखंड प्रहार-II’ आयोजित किया। इस अभ्यास में सेना की ब्लैक मेस ब्रिगेड और बैटल एक्स डिवीजन ने हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान आधुनिक सैन्य उपकरणों, तकनीक आधारित प्रक्रियाओं और विभिन्न सैन्य संसाधनों के बीच तालमेल पर विशेष ध्यान दिया गया।
‘अखंड प्रहार-II’ का आयोजन इससे पहले हुए ‘अखंड प्रहार-I’ की सफलता के बाद किया गया। इसका उद्देश्य बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप सेना की परिचालन क्षमता को परखना और संयुक्त अभियानों के दौरान अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना रहा। मरुस्थलीय इलाके की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आयोजित इस अभ्यास के जरिए सेना ने अपनी तकनीकी दक्षता और युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया।
आधुनिक सैन्य उपकरणों और तकनीक का किया गया इस्तेमाल
अभ्यास के दौरान नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और युद्धक क्षमता बढ़ाने वाले आधुनिक साधनों का उपयोग करते हुए विभिन्न सैन्य प्रक्रियाओं का परीक्षण किया गया। सेना का उद्देश्य यह परखना था कि आधुनिक तकनीक को पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के साथ जोड़कर किस तरह अधिक प्रभावी ढंग से अभियान चलाए जा सकते हैं।
आज के युद्धक्षेत्र में केवल सैन्य संसाधनों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनका सही समय पर और सटीक इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभ्यास में तकनीकी संसाधनों और सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर ध्यान दिया गया।
इसके साथ ही विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप कार्रवाई करने की क्षमता को भी परखा गया। इस तरह के अभ्यास सैनिकों को वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संयुक्त सैन्य अभियानों में समन्वय पर रहा विशेष जोर
‘अखंड प्रहार-II’ में विभिन्न सैन्य इकाइयों और संसाधनों के समन्वित इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया गया। आधुनिक युद्ध के दौरान कई तरह की सैन्य क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में उनके बीच बेहतर तालमेल और सटीक परिचालन योजना की अहमियत बढ़ जाती है।
अभ्यास के माध्यम से यह परखने का प्रयास किया गया कि अलग-अलग सैन्य संरचनाएं किस तरह एक साझा उद्देश्य के लिए प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं। इसके तहत परिचालन सटीकता, संसाधनों के समन्वय और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कार्रवाई करने की क्षमता को महत्व दिया गया।
सेना की तैयारियों में ऐसे संयुक्त अभ्यासों का उद्देश्य केवल उपकरणों का परीक्षण करना नहीं, बल्कि सैनिकों और सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर कार्यसमन्वय विकसित करना भी होता है। इससे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान संचालित करने की क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलती है।
मरुस्थलीय क्षेत्र में अभ्यास का विशेष महत्व
जैसलमेर का मरुस्थलीय क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सैन्य प्रशिक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां की परिस्थितियों में सैन्य संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल, परिचालन योजना और इकाइयों के बीच समन्वय विशेष मायने रखते हैं।
ऐसे वातावरण में सैन्य अभ्यास करने से सैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है। साथ ही, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी परखा जा सकता है।
‘अखंड प्रहार-II’ में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं के समन्वय पर जोर इसी दिशा में एक प्रयास रहा। बदलते युद्ध परिदृश्य में तकनीकी साधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए सेना के लिए जरूरी है कि वह अपने प्रशिक्षण और परिचालन प्रक्रियाओं को समय के अनुरूप विकसित करती रहे।
कोणार्क कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल एवीएस राठी ने की सराहना
कोणार्क कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल एवीएस राठी ने अभ्यास के दौरान सैन्य संरचनाओं की तकनीकी दक्षता, परिचालन उत्कृष्टता और युद्धक तैयारियों की सराहना की।
उन्होंने अभ्यास में प्रदर्शित क्षमताओं को आधुनिक सैन्य तकनीकों के प्रभावी उपयोग और बेहतर परिचालन कार्यप्रणाली से जोड़कर देखा। इस तरह के अभ्यास सेना को अपनी तैयारियों का आकलन करने और भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों के अनुरूप क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देते हैं।
भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए सेना की तैयारी
‘अखंड प्रहार-II’ का व्यापक उद्देश्य आधुनिक तकनीक, नए सैन्य उपकरणों और विभिन्न युद्धक क्षमताओं के एकीकृत इस्तेमाल के जरिए सेना को भविष्य की परिस्थितियों के लिए तैयार करना रहा। अभ्यास ने संयुक्त सैन्य अभियानों में तालमेल, तकनीकी दक्षता और सटीक कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया।
भारतीय सेना बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप अपनी परिचालन क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दे रही है। आधुनिक उपकरणों के साथ प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से सैन्य इकाइयों को नई तकनीकों के साथ काम करने और विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से अभियान चलाने के लिए तैयार किया जाता है।
‘ट्रांसफॉर्मिंग वारफेयर, डॉमिनेटिंग टुमॉरो’ यानी युद्ध के स्वरूप में बदलाव के जरिए भविष्य में बढ़त हासिल करने की अवधारणा के अनुरूप ‘अखंड प्रहार-II’ को आधुनिक युद्धक तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभ्यास के रूप में देखा जा रहा है।
