आईसीजी कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने दी चेतावनी: युद्ध का फैसला पल भर में होता है

खबर रफ़्तार, नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईसीजी कमांडरों के सम्मेलन में कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल गया है और अब यह घंटों व सेकंडों में तय होता है। उन्होंने साइबर व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को मौजूदा हकीकत बताया और आईसीजी को अत्याधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत पर भी बल दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि युद्ध का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है और यह अब घंटों और सेकंडों में तय ने लगा है, न कि महीनों में। उन्होंने बताया कि उपग्रह, ड्रोन और आधुनिक सेंसरों ने युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलते माहौल में भारतीय तटरक्षक बल यानी आईसीजी को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और रणनीतियों को लगातार अपनाना होगा।

42वें आईसीजी कमांडरों के सम्मेलन में बोलते हुए सिंह ने कहा कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अब सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत है। कोई भी दुश्मन देश हमारे सिस्टम को मिसाइल से नहीं, बल्कि हैकिंग, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से पंगु बना सकता है। ऐसे हालात से निपटने के लिए आईसीजी को अपने प्रशिक्षण और उपकरण लगातार अपग्रेड करने होंगे।
तकनीकी निगरानी की जरूरत
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वचालित निगरानी नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम बेहद जरूरी हैं ताकि प्रतिक्रिया समय सेकंडों में तय किया जा सके। उन्होंने कहा कि 7,500 किलोमीटर लंबा तटीय इलाका और अंडमान-निकोबार व लक्षद्वीप जैसे द्वीप भारतीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मियों और आधुनिक तकनीक का होना अनिवार्य है।
बदलते समुद्री खतरे
मंत्री ने कहा कि समुद्री खतरे अब बहुआयामी और तकनीकी आधारित हो गए हैं। पहले जो तस्करी या समुद्री डकैती के पैटर्न तयशुदा होते थे, अब वे जीपीएस स्पूफिंग, रिमोट-कंट्रोल नावों, एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन और डार्क वेब नेटवर्क का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आतंकवाद और नई तकनीक
उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकी संगठन भी अब डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक तरीके अब पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए आईसीजी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन, साइबर-डिफेंस सिस्टम और ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म जैसे साधनों को अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

आईसीजी की उपलब्धियां
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईसीजी अब तक 1,638 विदेशी जहाजों और 13,775 विदेशी मछुआरों को पकड़ चुका है। बल ने 6,430 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए हैं, जिनकी कीमत करीब 37,833 करोड़ रुपये है। इसके अलावा आईसीजी ने जुलाई तक 76 खोज एवं बचाव मिशन चलाकर 74 लोगों की जान बचाई है। स्थापना से अब तक बल ने आपदा प्रबंधन अभियानों में 14,500 से अधिक लोगों की जान बचाई है।

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