पंद्रह दिन की शादी… हाई कोर्ट से एक साल के भीतर मांगा डिवोर्स, अदालत ने शर्त के साथ दे दी छूट

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खबर रफ़्तार, चंडीगढ़:  पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अपवाद की पस्थितियों में विवाह के एक वर्ष बाद ही तलाक के लिए याचिका दाखिल करने की अनिवार्य शर्त को नजरअंदाज किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने यह आदेश विवाह के बाद केवल 15 दिन साथ रहने के बाद अलग होकर सहमति से तलाक के लिए आवेदन करने वाले जोड़े की याचिका को मंजूर करते हुए जारी किया है।

यह मामला आया था सामने

याचिका दाखिल करते हुए नवा शहर निवासी दंपत्ति ने हाईकोर्ट को बताया कि उनका विवाह 27 मार्च 2023 को हुआ था और वैचारिक मतभेद के चलते दोनों 13 अप्रैल से अलग रहने लगे। इसके बाद दोनों ने सहमति से तलाक के लिए हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार अदालत में आवेदन दिया। अदालत ने यह कहते हुए उनके आवेदन को रद्द कर दिया कि उनके विवाह को एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में जोड़े को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करनी पड़ी और निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की याचिका में मांग की गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में जोड़ा केवल 15 दिन साथ रहा लेकिन उनके बीच रिश्ता बचाने की कोई संभावना नहीं बची है। महिला 37 साल की है और पुरुष 41 वर्ष का, दोनों पढ़े लिखे हैं और ऐसे में उन्हें जीवन में आगे बढऩे देना चाहिए। भले ही हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार एक वर्ष बीत जाने से पहले केस दाखिल नहीं किया जा सकता लेकिन अपवाद वाली परिस्थितियों में इसे नजरअंदाज किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए दंपत्ति को सहमति से तलाक केलिए निचली अदालत में याचिका दाखिल करने की छूट दे दी है।

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