अवैध शस्त्र फैक्ट्री में बन रही थी डबल बैरल रायफल, छापा मारकर अंदर पहुंची पुलिस तो नजारा देख रह गई दंग

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ख़बर रफ़्तार, कन्नौज: अवैध असलहे बनाने वाले अब डबल बैरल रायफलें भी बना रहे हैं। 315 बोर की इस रायफल में मैगजीन नहीं लगती, डबल बैरल बंदूक की तरह ही गोलियां लगानी पड़ती हैं। मामला पकड़ा गया मंगलवार को छिबरामऊ के अकबरपुर गांव में। यहां खंडहर मकान में पूरा खेल चल रहा था।

पुलिस ने 24 असलहे बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि डबल बैरल रायफल बनाने का जिले में यह पहला मामला है। एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसका साथी भाग निकला।

छिबरामऊ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अवैध असलहे बनाने की सूचना मिली थी। मंगलवार को छापा मारा गया तो मैनपुरी जिले के थाना बेबर के जैतपुर गांव निवासी कौशलेंद्र उर्फ शेरू पकड़ में आया। उसका साथी कासगंज निवासी बृजेश शर्मा भाग निकला।

पुलिस ने चार रायफल, एक बंदूक, 18 तमंचे और एक अर्धनिर्मित तमंचा बरामद किया। पुलिस के लिए हैरानी की बात यह है कि बरामद असलहों में एक देसी डबल बैरल रायफल भी है। यह 12 बोर की दोनाली बंदूक की तरह काम करती है।

कोतवाली प्रभारी ने बताया कि दोनों आरोपितों के खिलाफ अवैध शस्त्र बनाने के दो मामले मैनपुरी में दर्ज हैं। ये लोग बेहद सफाई से डबल बैरल रायफल तक बनाकर बेच देते थे। पुलिस की पूछताछ में कौशलेंद्र ने बताया कि अवैध असलहा बनाकर कन्नौज, मैनपुरी, इटावा, फर्रुखाबाद समेत हरदोई में सप्लाई करता था।

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पुलिस के मुताबिक, आरोपित कौशलेंद्र उर्फ शेरू डबल बैरल रायफल 30 हजार रुपये में, 10 हजार रुपये में बंदूक और पांच हजार रुपये में तमंचा बेचता था। अपराधी इस तरह की देसी रायफल महंगे दामों में खरीदते हैं। चुनाव में असलहों की मांग बढ़ने पर साथी बृजेश के साथ असलहा बना रहा था।

एसपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि अवैध असलहों का प्रयोग चुनाव में इस्तेमाल होने की आशंका थी। जांच की जा रही है। वहीं, डबल बैरल रायफल के बनते देख पुलिस अफसर भी दंग रहे गए। इससे पहले ऐसी रायफल के बनाए जाने की बात सामने नहीं आई है।

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