खबर रफ़्तार, नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले की जांच और सुनवाई में हुई खामियों को उजागर किया है। जिसके बाद कोर्ट ने अभिलेखों के पुनर्निर्माण का निर्देश दे दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े तीन मामलों की जांच और सुनवाई में खामियों को उजागर किया है। कोर्ट ने इन मामलों के रिकॉर्ड दोबारा बनाने का आदेश दिया है, क्योंकि पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। यह मामला राज नगर, दिल्ली कैंट में हुए दंगों से जुड़ा है, जहां 1986 में सभी आरोपी बरी हो गए थे। कोर्ट ने कहा कि बिना रिकॉर्ड के फैसले की सही जांच नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी स्रोतों से ऐसे रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम प्रयास किए जाने की आवश्यकता है ताकि कोर्ट वर्तमान आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम निर्णय दे सके। बता दें कि निचली अदालत ने 1986 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। ये मामले नवंबर 1984 में दिल्ली कैंट के राज नगर इलाके में हुए सिख विरोधी दंगों से संबंधित है।

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