खबर रफ्तार, नई दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में एक विमान हादसे में मौत हो गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हादसे की मिनट-दर-मिनट रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि कम विजिबिलिटी के कारण यह दुखद घटना हुई।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन की घटना पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में उस चार्टर्ड विमान के क्रैश होने से पहले की घटनाओं का मिनट-दर-मिनट ब्योरा दिया गया है। शुरुआती जांच में हादसे की वजह खराब मौसम और कम विजिबिलिटी को बताया जा रहा है।

विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने क्या कहा?
केंद्रीय विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 8:48 बजे लैंडिंग के समय विजिबिलिटी कम थी। DGCA और AAIB की टीम जांच कर रही है। लैंडिंग से पहले ATC बारामती से संपर्क होने पर पायलट ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा। रनवे साफ न दिखने पर विमान हवा में चक्कर लगाता रहा। दूसरी बार भी लैंडिंग की कोशिश की गई, लेकिन विजिबिलिटी नहीं थी। थोड़ी देर बाद पायलट ने दोबारा लैंडिंग की कोशिश की। पहले पायलट्स की तरफ से ATC के सवाल का जवाब नहीं आया, लेकिन कुछ समय बाद पायलटों ने रनवे साफ दिखने की बात कही, इसके बाद ATC ने लैंडिंग की क्लियरेंस दे दी। हालांकि, थोड़ी ही देर बाद विमान क्रैश की खबर आ गई। पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच हो रही है।
मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट
मंत्रालय के अनुसार, यह रिपोर्ट हवाई अड्डे पर मौजूद एटीसी सर्विस के एक कर्मचारी के बयान के आधार पर तैयार की गई है। बारामती एक अनियंत्रित हवाई अड्डा है, जहां पूरी तरह से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) यूनिट नहीं है। यहां उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के प्रशिक्षक या पायलट ही यातायात की जानकारी देते हैं। विमान की पहचान VI-SSK के रूप में हुई है।
हादसे से पहले क्या हुआ था?
मंत्रालय के मुताबिक, 28 जनवरी 2026 को VI-SSK विमान ने सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर पहली बार बारामती से संपर्क किया। इसके बाद विमान ने तब संपर्क साधा जब वह बारामती से 30 समुद्री मील दूर था। उस समय पायलट को अपने विवेक से विजुअल मेट्रोलॉजिकल कंडीशन में नीचे उतरने की सलाह दी गई थी।
इसके तुरंत बाद पायलट ने हवा की गति और विजिबिलिटी के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि हवा शांत है और विजिबिलिटी लगभग 3000 मीटर है। फिर विमान ने रनवे 11 पर अंतिम लैंडिंग की तैयारी की सूचना दी, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि रनवे नजर नहीं आ रहा है। इसके बाद पायलट ने लैंडिंग न करके विमान को वापस ऊपर उड़ा लिया।
लैंडिंग की दूसरी कोशिश और हादसा
जब विमान दोबारा चक्कर लगाकर आया, तो पायलट ने फिर से रनवे 11 पर उतरने की सूचना दी। उनसे कहा गया कि जब रनवे दिखे तो बताएं। पायलट ने जवाब दिया, “अभी रनवे नहीं दिख रहा है, दिखने पर बताएंगे”। कुछ सेकंड बाद उन्होंने बताया कि उन्हें रनवे दिख गया है। सुबह 8 बजकर 43 मिनट पर विमान को रनवे 11 पर उतरने की मंजूरी दे दी गई।
मंत्रालय ने कहा कि पायलट ने लैंडिंग की मंजूरी मिलने की कोई सूचना वापस नहीं दी। ठीक एक मिनट बाद 8 बजकर 44 मिनट पर हवाई अड्डे के कर्मचारियों ने रनवे 11 के पास आग की लपटें देखीं। आपातकालीन सेवाओं को तुरंत दुर्घटना स्थल पर भेजा गया। विमान का मलबा रनवे के बाईं ओर पाया गया। इस हादसे में अजित पवार के अलावा उनके दो स्टाफ सदस्य, एक निजी सुरक्षा अफसर और एक सहायक समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।

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