खबर रफ़्तार, प्रयागराज : गंगा और यमुना उफान पर है। दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। फिलहाल जलस्तर बढ़ने की गति जारी है। बाढ़ का पानी शहर के गंगानगर, अशोक नगर, छोटा बघाड़ा, बेली, राजापुर सहित कई बस्तियों में पहुंच गया है। बाढ़ राहत शिविरों में लोगों की संख्या बढ़ रही है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर 84 मीटर के पर पहुंच गया है। खतरे का निशान 84.734 पर है। बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे सिंचाई विभाग की ओर से जारी बाढ़ बुलेटिन के अनुसार नैनी में यमुना 84.9 मीटर और फाफामऊ में गंगा 84.39 मीटर पर बह रही हैं। जलस्तर में बढ़ोत्तरी फिलहाल जारी है। बाढ़ का पानी शहर की कई बस्तियों में पहुंच गया है। जिससे लोग पलायन कर रहे हैं। बाढ़ से दो हजार से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। राहत शिविरों में प्रभावितों की संख्या बढ़ती जा रही है।
छह शिविर खुले, दो हजार से अधिक शरणार्थी पहुंचे
नदियों के जलस्तर में वृद्धि के साथ बाढ़ पीड़िताें की संख्या भी बढ़ती जा रही है। करीब तीन दर्जन मोहल्लों के हजारों परिवार इसकी चपेट में आ गए हैं। प्रशासन के अनुसार, दो हजार से अधिक लोगों को बाढ़ राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। शिविरों में पहुंचने का क्रम देर रात तक जारी रहा।
अशोक नगर, नेवादा, राजापुर, बेली, सलोरी और बघाड़ा में स्थिति ज्यादा खराब है। बेली और राजापुर समेत कछारी इलाकों के नालों में भी बाढ़ का पानी भर गया है। ऐसे में लोगों के घरों का पानी भी बस्तियों में फैल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रथम तल पर सामान शिफ्ट कर दिया है। वहीं हजारों लोग पलायन करने के लिए मजबूर हुए हैं। इनके लिए प्रशासन की ओर से भी बाढ़ राहत शिविर खोले गए हैं। बुधवार शाम तक करीब 500 परिवार के दो हजार से अधिक लोग इन शिविरों में शरण ले चुके हैं।
एक सप्ताह तक बाढ़ की समस्या बनी रहने की बात कही जा रही है। इसलिए प्रशासन की ओर से बाढ़ में फंसे लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। बुधवार को प्रभावित इलाकों में माइक से लगातार अपील की जाती रही।
सेंट जोसेफ बालिका स्कूल परिसर को बनाया शिविर
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